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जिदी खुशबू की जानदार कहानी

अशोक प्रियदर्शी
‘मैं बहुत रोती थी। कोई दिन ऐसा नही होता था जब गेम को लेकर मैं रोती नही। अपने दोस्तों को ग्राउंड जाते देखती थी तब मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगता था। लगता था कि मैं भाग जाउं। कुछ कर लूं। समझ नही आता था। मैं बहुत परेशान थी। दो तीन दिन तक खाना भी नही खायी थी।’ बिहार महिला हैंडबाॅल टीम की कप्तान खुशबू ने अपनी परेशानी को कुछ इस तरह बयां करती है। लेकिन वह हार नही मानी और एक नयी लकीर खिंची। वह पिछले साल उजबेकिस्तान के ताशकंद में 23 सितंबर से 2 अक्तूबर तक आयोजित एशियन वुमेन क्लब लीग हैंडबाॅल चैम्पियनशिप में भारतीय टीम में बिहार का प्रतिनिधित्व की।
दरअसल  खुशबू  ग्रामीण परिवेश नवादा से आती है। प्रैक्टिश के दौरान देर हो जाने पर समाज टिप्पणी करता था। इसके चलते मम्मी पापा ने गाउंड मंे जाने से मना कर दिया था। लेकिन खुशबू ने संघर्ष की। मम्मी पापा से सहमति ली। उसके बाद वह छा गई।

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