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चिट ने दो दिलों को मिलाया

अशोक प्रियदर्शी
          बात चार साल पहले की है। बिहार के नवादा के एक परीक्षा केन्द्र पर हिसुआ इलाके का एक युवक राजेश (काल्पनिक नाम) की बहन रजनी (काल्पनिक नाम) परीक्षा दे रही थी। बहन रजनी को नकल कराने के लिए राजेश हर रोज जाता था। बहन रजनी की जहां सीट थी, उसके पहले एक दूसरी लड़की काजल (काल्पनिक नाम) बैठती थी। लिहाजा, राजेश पहले दिन जब चिट पहुंचाने गया तब ढेला में बांधकर चिट को फेंका। लेकिन वह ढेला रजनी के पास नही जाकर काजल के पास गिर गया।
         काजल ने उस चिट को तुरत उठा ली। उसे देखने लगी। तब खिड़की में लटका राजेश ने बगल की लड़की काजल से उस चिट को बहन को दे देने को कहा। काजल ने मुस्कुराई। फिर बोली थोड़ा नोट कर लेती हूं। फिर दे देती हूं। लेकिन राजेश बहन को चिट देने के लिए काजल को डांटकर दबाव बना रहा था। तब उसकी बहन रजनी ने कहा कि अभी लिख रही हूं तबतक उसे लिखने दो। फिर उससे ले लेंगे। उसके बाद राजेश वापस लौट गया। दूसरी दफा फिर राजेश चिट पहुंचाने आया तब फेंकने के पहले काजल ने हाथ बढ़ा दी। राजेश ने बहन की ओर इशारा किया। बहन ने जब हामी भर दी तब राजेश वापस लौटा।
        पहले दिन की पहली पाली की परीक्षा खत्म हो गई। काॅपी जमा करने के दौरान काजल ने रजनी की ओर बढ़ी। उसका शुक्रिया अदा करते हुए उससे परिचय बढ़ाई। उसके बाद परीक्षा हाॅल से निकली। इधर, राजेश ने बहन को बाहर आते ही सवाल करने लगा कि कितना रिस्क लेकर चिट पहुंचाने जाते हैं। लेकिन तुम उसे दे देती हो। तब बहन रजनी ने आश्वस्त किया कि वह चिट दे देती है। मजिस्ट्रेट के आने पर वह चिट को खिड़की से बाहर फेंकने में मदद करती है। लिहाजा, राजेश आश्वस्त हो गया।
        अगले दिन जैसे ही राजेश खिड़की के समीप पहुंचा। काजल ने उसका चिट अपने हाथ में ले लेती है। बहन की ओर देखता है तब बहन भी इत्मिनान दिखती है। इसके बाद से यह सिलसिला बन गया था। दो दिनों के बाद दोनों के परिजन भी करीब आ गए। काजल ने अपने पिता के सामने राजेश की तारीफ की। उसके बाद काजल के पिता ने भी राजेश का शुक्रिया अदा किया। उसके बाद राजेश मन ही मन अपनी जिम्मेवारी बढ़ा लिया। दोनों के लिए चिट पहुंचाना उसकी जिम्मेवारी बन गई।
         यही नहीं, स्थिति ऐसी हो गई कि जब बहन कमरे से पहले निकल जाती थी तब राजेश काजल को बाहर आने के लिए गेट पर इंतजार करने लगा। काजल से भी परीक्षा के जवाब लिखने के बारे में पूछने लगा। करीब हफते भर की परीक्षा में दोनो परिवार काफी नजदीक आ गए। लड़की के पिता भी राजेश और उसकी बहन रजनी के काफी करीब आ गए। वह भी रजनी का हाल चाल लेने लगे। बात यहीं खत्म नही होती है। परीक्षा समाप्त होने के बाद एक दिन लड़की के पिता लड़के के घर शादी का प्रस्ताव लेकर पहुंच गए। लड़केवाले को भी लड़की पसंद थी। इसलिए बिना देर किए दोनों की शादी तय हो गई। दो माह के अंतराल में शादी हो गई। राजेश और काजल एक दंपति बन गए हैं।

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