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अभिशाप से मुक्त होगा रजौली का याज्ञवल्क्य और लोमस ऋषि पर्वत !


अशोक प्रियदर्शी। नवादा
रजौली के याज्ञवल्क्य और लोमस ऋषि पहाड़ी अब अभिशाप से मुक्त होगा। ऐसा इसलिए उम्मीद की जा रही है कि नवादा जिला प्रशासन ने बिहार के पर्यटन विभाग को जरूरी कदम के लिए अनुशंसा कर दी है। दरअसल, पटना हाईकोर्ट के सीडब्लूजेसी संख्या- 9591/2021 के आदेश के आलोक में पर्यटन विभाग अपने पत्रांक 2560 दिनांक 30 नवंबर 2022 के जरिए जिला प्रशासन से याज्ञवल्क्य और लोमस ऋषि पहाड़ियों के पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर जरूरी सवालों के साथ निर्धारित प्रारूप में जानकारी मांगी गई थी।
बहरहाल, जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने बिहार के पर्यटन विभाग के विशेष सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रारूप को भेज दिया है। पत्र में लोमस और याज्ञवल्क्य ऋषि पहाड़ियों को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित और सौंदर्यीकरण की अनुशंसा की गई है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऋषि पहाड़ियों के पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं है। अनापति प्रमाणपत्र दिया जा सकता है। तब से लोगों में पर्यटन विकास की उम्मीदें जग गई है।

क्या मांगी गई थी जानकारी
दरअसल, पर्यटन विभाग ने जिला प्रशासन को एक प्रारूप भेजा था। प्रारूप के जरिए ऋषि पहाड़ियों के पर्यटन से संबंधित कई जानकारियां मांगी गई थी। करीब ढ़ाई साल बाद विभाग को यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 179 एकड़ 83 डिसमील गैरमजरूआ आम किस्म की जमीन है। भूमि हस्तांतरण की आवश्यकता नही है। अतिक्रमण और विवाद रहित है। लोकेशन में गया से 60 और पटना से 150 किलोमीटर जबकि एनएच-20 से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। पर्यटक सूचना केन्द्र से 30 किलोमीटर की दूरी है। आवागमन के लिहाज से पक्की सड़क है। पेयजल सुविधा के नाम पर चापाकल और कुआं है। होटल भोजनालय की दूरी डेढ़ किलोमीटर है। सरकार द्वारा सृजित योजना में सामुदायिक भवन है। सबसे अहम कि पर्यटन की दृष्टि से ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है।

टूरिस्ट क्षेत्र के रूप में विकसित का आदेश
      दरअसल, 2010 में रजौली के तत्कालीन सीओ ने ऋषि पहाड़ियों के खनन को लेकर अनापति प्रमाण दे दिया था। वन विभाग और खनन विभाग ने कई जरूरी तथ्यों को छिपा लिया था। ऋषि पहाड़ियां इको सेंसीटिव जोन में आता है। 10 किलोमीटर की परिधि में खनन किया जाना प्रतिबंधित है। जबकि कोडरमा से 8.6 किलोमीटर और रजौली वन क्षेत्र से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी है। 500 मीटर के अंदर नाला, नदी, स्कूल और बसावट नही होना चाहिए। धार्मिक आस्था का केन्द्र नही होना चाहिए। लेकिन सभी चीजें होने के बाद भी खनन के लिए अनापत्ति दे दिया गया था। लिहाजा, खनन शुरू हो गया था।
    तब सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार सिंह ने पटना हाइकोर्ट में रिट याचिका दाखिल किया था। दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उठाया था। 31 अगस्त 2021 को पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश एस कुमार ने लोमस और याज्ञवल्क्य ऋषि पहाड़ियों के खनन पर स्टे लगाई थी। फिर पूरी सुनवाई के बाद 18 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रण और न्यायाधीश पार्थ सारथी ने ऋषि पहाड़ियों पर भविष्य में भी खनन पर रोक का सख्त आदेश दिया था। आदेश में टूरिस्ट डिपार्टमेंट और नवादा डीएम को टूरिस्ट क्षेत्र के रूप में विकसित करने का आदेश दिया था। 23 नवंबर 2021 को पीएमओ ने भी बिहार के पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव को ऋषि पहाड़ियों को रामायण सर्किट में जोड़ने को लिखा था।

पौराणिक रूप से महत्वपूर्ण है ऋषि पहाड़ियां
      लोमस और याज्ञवल्क्य ऋषि पहाड़ियां पौराणिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। रक्षा बंधन के अवसर पर मेला लगता है। एलएसएस ओ मोली के बिहार डिस्ट्रिक्ट गजेटियर में इसका जिक्र मिलता है। 1871 में तत्कालीन राजा ने पूजारी नियुक्त किया था। बहरहाल, स्थानीय स्तर पर ज्ञाज्ञवल्क्य ऋषि की गुफा में याज्ञवल्क्य ऋषि और भगवान भास्कर की प्रतिमा की स्थापित की गई है। दूसरी तरफ, लोमस ऋषि में लोमस ऋषि और शंकर भगवान की मूर्ति स्थापित किए जाने का पहल हो रहा है।

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